आखिर किस किस के योगदान से बना टाटा नंबर वन ।। टाटा ग्रुप की अनसुनी सच्चाई [paid promoted blog]

 टाटा ग्रुप

टाटा कंपनी का नाम सुनते ही आपके दिमाग में सबसे पहले क्या आता है ।

टाटा कंपनी की कहानी


अगर उनके उत्पादों को छोड़ दिया जाए यानी टाटा साल्ट , टाटा की गाड़ियां और अन्य तरीके के उत्पाद । तो आपके दिमाग में एक व्यक्ति की छवि नजर आती होगी या उसका नाम आपको याद आता होगा जो कि है-: श्री रतन टाटा

लेकिन टाटा कंपनी का सारा श्रेय रतन टाटा को देना उतना ही गलत है जितना कि टीम इंडिया के हारने पर जवाबदेही विराट कोहली को देना ।

टाटा कंपनी धीरे धीरे बहुत समय पहले से अपने पांव व्यवसाय जगत में पसार रही थी । रतन टाटा जी ने तो बस उसे और बढ़ाने में मदद करी । तो चलिए देखते हैं टाटा कंपनी आखिर कैसे शुरू हुई और आज पूरे व्यवसाय जगत में अपनी अमित छाप छोड़ चुकी है ।

टाटा ग्रुप की शुरुवात

जमशेद जी टाटा का टाटा ग्रुप में योगदान-

जमशेदजी टाटा की तस्वीर


1868 मैं जमशेद जी एन टाटा जो कि उस समय अपने पिता की कंपनी में काम किया करते थे । उन्होंने टाटा कंपनी की नीव डाली । सिर्फ ₹21000 से उन्होंने इस बिजनेस के शुरुआत करी । शुरुआत में ₹21000 से उन्होंने एक ऑयल मिल खरीदी । जिसे बाद में उन्होंने कॉटन मिल में बदला । लगातार दो साल अपना सारा ध्यान व पैसा कॉटन मिल में लगाकर उन्होंने 2 साल बाद उस मिल को अच्छी खासी लागत में  बेच दिया ।

जमशेदजी टाटा के जीवन की एक झलक

जमशेदजी टाटा जी की व्यक्तित्व की तारीफे उनकी दूर की सोच की वजह से की जाती है । वर्तमान में जीते जीते उन्होंने कई साल बाद होने वाली घटनाओं का सही अनुमान लगा दिया था ।उन्हें यहां तक अंदाजा हो गया था कि भविष्य में किन चीजों के दाम गिरेंगे व किन चीजों के बढ़ेंगे ।

इसी के चलते वे अपना एक सपना पूरा करना चाहते थे वह चाहते थे की भारत में 4 व्यवसाय में पकड़ बनाई जाए क्योंकि उन्हें मालूम था कि इस चार व्यवसाय बाद में जाकर बहुत मुनाफा देंगे । और वह चार व्यवसाय थे-

1 iron and Steel company आयरन एंड स्टील कंपनी

2 hydroelectric power plant हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट

3 international educational institute विश्व स्तरीय शिक्षण संस्थान

4 a long chain of luxury hotels बेहतरीन होटल निर्माण की एक श्रृंखला


इन्हीं चार मुद्दों को दिमाग में रखते हुए उन्होंने 1804 में एक कॉटन मिल फिर से खरीदा और उसके निर्माण में जी जान लगा दी । कॉटन मिल कर व्यवसाय में मुनाफा कमाने के बाद अगली बारी थी होटल निर्माण की ।

ताज होटल का निर्माण

उन्होंने 1903 मैं मुंबई में एक ऐसा होटल खड़ा कर दिया जो कि अपने आप में कला की बेहतरीन मिसाल थी । उस होटल का नाम ताज होटल रखा गया । वह भारत का पहला होटल था जो पूर्ण रूप से बिजली पर चलता था । और उसमें सारी विश्व स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध थी ।

दोराबजी टाटा का टाटा ग्रुप में योगदान

वक्त की कमी पैसे के अभाव व उम्र के आखिरी पड़ाव होने की वजह से वे अपने सारे व्यवसाय नहीं खोल पाए । उनके इन्हीं सपनों को पूरे करने की राह पर उनके बड़े बेटे दोराबजी टाटा निकल पड़े।

दोराबजी टाटा की तस्वीर


उन्होंने 1907 में टाटा आईरन एंड स्टील कॉरपोरेशन TISCO की स्थापना की जो कि बाद में जाकर काफी सफल हुई । ठीक 4 साल बाद ही उन्होंने इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस  IIS की स्थापना की जोकि एक अंतरराष्ट्रीय शिक्षा संस्थान था ।

टाटा ग्रुप का कर्मचारियों के साथ बर्ताव

कर्मचारियों के साथ अच्छा बर्ताव करते टाटा ग्रुप


इन सारे व्यवसाय के क्षेत्रों में टाटा कंपनी अपने कदम रख चुके थे । उन्होंने हर क्षेत्र में अपना वर्चस्व कायम रखा परंतु इसका कारण सिर्फ उनके शीर्ष पर बैठे लोग नहीं है बल्कि उनके कर्मचारी ने भी उनकी इस सफलता तक पहुंचने में काफी मदद की है । वह इसलिए क्योंकि टाटा शुरू से ही अपने कर्मचारियों के साथ अच्छा व्यवहार करते आया है और कभी भी कोई शिकायत का मौका नहीं देता ।

जेआरडी टाटा का टाटा ग्रुप में योगदान

जमशेदजी टाटा के बाद अगर किसी और व्यक्ति का नाम कंपनी के विस्तार के लिए आना जरूरी है तो वह है श्री जेआरडी टाटा । इन्होंने अपनी सूझबूझ व व्यवसाय में कौशल की वजह से टाटा कंपनी को नई ऊंचाइयां प्रदान कराई । इनके व्यवसाय में आने से पहले टाटा कंपनी 14 कंपनियों को व्यवसाय में ला चुकी थी परंतु इन्होंने इन 14 कंपनियों को अपने हाथ में रखते हुए कंपनी संख्या 94 तक पहुंचा दी ।

जेआर डी टाटा की तस्वीर


इन्होंने 1945 में टाटा मोटर्स की शुरुआत करी । टाटा मोटर्स की सफलताओं के बाद ही उन्होंने 1952 में टाटा एयरलाइंस की भी शुरुआत करी ।

टाटा एयरलाइंस क्यों नहीं कमा पाई मुनाफा

परंतु टाटा मोटर्स के बाद शुरू की गई टाटा एयरलाइंस उन्हें उतना ज्यादा मुनाफा नहीं दे पाई क्योंकि टाटा एयरलाइन लॉन्च करने के बाद ही सरकार ने उसमें अपना हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया सरकार का कहना था कि कोई भी निजी कंपनी किसी एयरलाइंस को नहीं चला सकती इसलिए टाटा कंपनी को एयरलाइंस सरकार को सौंपनी पड़ी तथा मैनेजमेंट उन्होंने अपने हाथ में रखा । कुछ साल बीतने के बाद सरकार ने पुनः उनसे उनके मैनेजमेंट के अधिकार भी छीन लिए तथा पूर्ण रूप से सारे शैयर अपने पास रख कर टाटा एयरलाइंस पर सरकार की पकड़ बना ली और टाटा एयरलाइंस सरकार के अंतर्गत चलने लगी जो कि ज्यादा मुनाफा ना कमाने की वजह से घाटे में रही और अब आप टाटा एयरलाइंस का हाल जानते होंगे ।

TCS की शुरुआत

1968 में जेआरडी टाटा ने टीसीएस की शुरुआत करें जोकि टाटा कंपनी के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद व्यवसाय रहा ।आज भी टाटा कंपनी टीसीएस से अपने कुल राशि का 50% राशि एकत्रित करती है ।

रतन टाटा जी का टाटा ग्रुप में योगदान

टीसीएस खुलने के सालों बाद एक ऐसे व्यक्ति ने व्यापार के मैदान में कदम रखे जिसने टाटा कंपनी की बुनियाद को बड़े-बड़े भूकंप में भी गिरने नहीं दिया । आप बिल्कुल सही समझ रहे हैं मैं बात कर रहा हूं श्री रतन टाटा जी की । 1991 की आर्थिक मंदी के दौर में इन्होंने टाटा कंपनी की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली ।

रतन टाटा जी की तस्वीर


मंदी के दौर में जब भारत की कंपनियां विदेशों में व्यापार कर रही थी विदेशों की कंपनियां भारत में आकर व्यापार करना चाहती थी और कई उद्योग उस समय बंद हो चुके थे । तो उस मंदी में भी कंपनी को सुचारू रूप से चलाने का श्रेय रतन टाटा जी को जाता है ।

उन्होंने कंपनी को सिर्फ संभाले ही नहीं बल्कि मंदी के इस दौर में सबसे ज्यादा मुनाफा कमा कर दिया । उन्होंने विदेशों से भारत में व्यापार कर रही कंपनियों को एक खुला निमंत्रण दिया उनसे कहा कि अगर वह टाटा कंपनी के साथ मिलकर रोजगार करते हैं तो उन्हें भारत में ज्यादा सफल होने की गुंजाइश है ।उन्होंने विदेशी कंपनियों को अपने सारे मॉड्यूल सारी बिजनेस की रणनीतियां समझा कर उन्हें मना लिया और मंदी के दौर में खूब व्यापार करा ।

टाटा अपने सारे छोटे उद्योगों के साथ


रतन टाटा जी का योगदान उस समय ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता हैं जब भारत में अपने पांव पसार रही इस कंपनी ने लंबी छलांग विदेशों की तरफ मारी । अपने कार्यकाल के दौरान रतन टाटा जी ने अपनी कंपनी की टुकड़िया विदेशों में भी खोली ।

टाटा ग्रुप की विदेशों में पकड़

आज के समय की बात की जाए तो -

1. यूरोप में टाटा की अपनी 19 निजी कंपनियां है जिनसे वह यूरोप में 60000 से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान कराते हैं ।

2.नॉर्थ अमेरिका में भी टाटा की 13 निजी कंपनियां अभी कार्य कर रही है जिनसे वहां पर 13000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है ।

3.वहीं भारत की बात की जाए तो पूरे भारत में 700000 से ज्यादा लोग टाटा के साथ जुड़े हैं वह प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से टाटा से रोजगार प्रदान करते हैं वह अपनी रोजी रोटी का आए कमाते हैं ।

टाटा ग्रुप द्वारा खरीदे गए विदेशी ब्रांड

अपने उत्पादों को भारत व विश्व में फैलाने के बाद टाटा ने कई और ब्रांड को कई और उत्पाद को कई कंपनियों को खरीदा है और उन्हें अपने अधिकार में लेकर व्यापार किया है। 

1.टाटा ने सन 2000 में टेटले जो कि एक टी मैन्युफैक्चर कंपनी है यानी चाय निर्माण की कंपनी है ।

टेटली लोगो


 उसे 432 मिलियन डॉलर में खरीदा । टेटली अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दूसरे नंबर की सबसे ज्यादा चाय का उत्पादन करने वाली कंपनी है ।


2. हाल ही के कुछ वर्षों में टाटा कंपनी ने जैगवार और लैंड रोवर जैसी कंपनियों पर भी अधिकार कर लिया है उन्होंने जेएलआर सीरीज को 2.3 बिलियन डॉलर में खरीदा ।

रतन टाटा जी लैंडरोवर व jagurar के साथ


इसी के साथ-साथ कुछ अन्य छोटी इकाई अभी टाटा के साथ जुड़ी हुई है जैसे टाटा डोकोमो और टाटा स्टारबक्स इत्यादि ।

ऊपर संपूर्ण सारांश का वीडियो रूपांतरण


धन्यवाद ।

नोट** ऊपर लिखे गए लेख में कोई भी गलती सुझाव या दिक्कत होने पर हम से संपर्क करने में न घबराए ।


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