हर विद्यार्थी को जानने चाहिए नवोदय के बारे में ये तथ्य-
1. भारत में तमिलनाडु एकमात्र ऐसा राज्य है जहां एक भी जवान नवोदय विद्यालय नहीं है ।
2016 17 की रिपोर्ट के हिसाब से 661 जवाहर नवोदय विद्यालय पूरे भारत में फैले हुए हैं । दिसंबर 2019 की रिपोर्ट यह बताती है की
636 जवाहर नवोदय विद्यालय पूर्ण रूप से सालाना कार्यरत हैं और उनमें पढ़ने वाले बच्चों की संख्या लगभग 265574 है । रिपोर्ट यह भी बताती है कि लगभग 78 फ़ीसदी जवाहर नवोदय विद्यालय ग्रामीण क्षेत्रों में बसे हुए हैं ।
2. 2019 में नवोदय विद्यालय समिति ने अपने पिछले सारे रिकॉर्ड को तोड़ते हुए सीबीएसई बोर्ड के विद्यालयों में 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षाओं में प्रथम स्थान प्राप्त किया था ।
अपने कड़े अनुशासन और अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा को लेकर जवाहर नवोदय विद्यालय हमेशा ही चर्चाओं में रहा है परंतु 2019 में उसने यह कारनामा करके दिखाया । सीबीएसई बोर्ड की पासिंग रिपोर्ट के मुताबिक जवाहर नवोदय विद्यालय में दसवीं बोर्ड की परीक्षाओं के अंतर्गत पास होने वाले विद्यार्थियों की संख्या 98.67% थी । वहीं दूसरी तरफ 12वीं बोर्ड की परीक्षाओं में पास होने वाले विद्यार्थियों की संख्या 96.62% थी । जोकि सीबीएसई बोर्ड में आज तक का सबसे अच्छा रिजल्ट रहा ।
3. नवोदय विद्यालय समिति निर्माण के बाद से सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत संविधान का एक भाग है ।
नवोदय विद्यालय का ख्याल उस समय के प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी के दिमाग में आया था । उनका मानना था कि ऐसे हम समाज के पिछड़े वर्ग के बच्चों को उनका हक दिला सकते हैं जो कि पढ़ाई मैं अच्छे है लेकिन संसाधनों की कमी की वजह से शिक्षा के स्रोतों से दूर हैं । उसी के बाद उन्होंने नवोदय विद्यालय समिति का गठन किया और उसे संविधान का एक अंग बनाया ।
4. झाझर (राजस्थान) और अमरावती (महाराष्ट्र) में सबसे पहले जवाहर नवोदय विद्यालय का निर्माण हुआ ।
समिति गठन के बाद से ही उनकी सर्वप्रथम जिम्मेदारी विद्यालयों को खोलने के स्थान के बारे में सोचने की थी । तो इसी के चलते शुरुआत की की गई राजस्थान और महाराष्ट्र से । राजस्थान में झांझर को और महाराष्ट्र में अमरावती को नवोदय विद्यालय के लिए चुना गया सर्वप्रथम 1985 86 के वर्ष में वहा नवोदय विद्यालय बनाए गए ।
5. अपने विद्यालय पाठ्यक्रम में 3 भाषाओं को स्थान देने वाला या प्रथम विद्यालय बना ।
समिति गठन व विद्यालय निर्माण के बाद अगली भूमिका पाठ्यक्रम पर आती है । तो विद्यालय विषयों में सोचें जाने पर 13 भाषाओं को पाठ्यक्रम में जोड़ा गया जिसमें दो मूल भाषा पूरे भारत में चलती हैं तथा तीसरी भाषा को स्थान के हिसाब से अलग-अलग छाटा गया और मूलतः जिस स्थान की भाषा होती थी वहां नवी कक्षा में बच्चों को माइग्रेशन के लिए भेजा जाने लगा ।
नवोदय विद्यालय से पढ़े कुछ बच्चों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योगदान
1. मेजर डॉ सुरेंद्र पूनिया :
इन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई खेलों में पुरस्कार प्राप्त किए हैं । अभी भारतीय जनता पार्टी से राजनेता है । व इनका नाम लिम्का रिकॉर्ड बुक ऑफ इंडिया में दर्ज है ।
2. संदीप महापात्र :
इन्होंने कैमरा जगत के फील्ड में बहुत योगदान दिया है इन्होंने कई ऐड फिल्म , कई मूवीस व वीडियोस बनाए हैं । उनके द्वारा बनाई गई फिल्म द साइलेंट स्टैचू फेस्टिवल कॉर्नर के लिए भी चुनी गई थी ।
3. सी के विनीत :
उन्होंने इंडियन सुपर लीग में केरला ब्लास्टर फुटबॉल क्लब से खेला हुआ है व अन्य कई टीमों के साथ बेहतरीन प्रदर्शन दिखाने के बाद यह भारतीय फुटबॉल टीम का भी हिस्सा रह चुके हैं ।
4. ललित प्रभाकर :
इन्होंने मराठी जगत की फिल्मों में अपना योगदान दिया है । ये मराठी की कई फिल्में कर चुके है । टेलीविजन के बहुत अच्छे अदाकार रह चुके हैं तथा कई फिल्मों के लिए इन्हें पुरस्कार भी मिला है ।










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